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शहीद ए आजम


मैं संधू जट्ट पंजाबीबापू किशन सिंह विद्यावती महतारी,

मुझको आजादी से ज्यादा कहां कोई चीज थी प्यारीबिस्मिल सुखदेव राजगुरु आजाद अशफाक से थी मेरी यारी,

नहीं थी खुशी किसी दिवाली और ईद से कमजब आई वतन के लिए फांसी पे झूलने की बारी ।

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