ऐसा नहीं भूल गया हूं सब कुछ 

आज भी गांव मेरा मुझे बहुत याद आता है

जन्म का मेरा उससे नाता है

आत्मा वहीं बसती है घर भी वहीं हैं

मकान तो कहीं भी खरीद लिया जाता है

शहर की चकाचौंध में पल भर तो अच्छा लगता है

मगर सच में इनसे मन ऊब गया है अब

हर शख्स अपने गांव वापस जाना चाहता है ...