मश्ग़ला मेरा यही है आज कलसाहिल पे बैठ केरेत पे तेरा नाम लिखता हूं बार बारऔर लहरें आ आके मिटाती रहती हैं ...
मश्ग़ला मेरा यही है आज कलसाहिल पे बैठ के
रेत पे तेरा नाम लिखता हूं बार बारऔर लहरें आ आके मिटाती रहती हैं ...