कशमकश में ही रहता हूं

कब उससे कुछ कहता हूं

वो बैठा रहता है पहरों मेरे साथ

उसकी बातें ही बस सुनता हूं

और जब मेरा दिल 

कुछ बोलने को होता है

चुप हो जा अभी

उसे आहिस्ता से कहता हूं

यूं कभी आता नहीं वक़्त

वो भी चला जाता है

मैं ख़ामोश ही रहता हूं

मैं कशमकश में ही रहता हूं ...