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कफ़स


मुझे आज़ाद रख या क़फ़स में,फर्क नहीं कुछ ख़ास दोनों में,

बस दिल के अपने आस पास रखनादिल पूरा न दे मैं खुश रहूंगा कहीं भी कोनों में ...

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