मुझ को रोटी की ही भूख होती
तो ठीक था
जाने कहां से शान ओ शौहरत की
चाहत जग आ
मेहनत से काम चल रहा था खासा
अब बेईमानी हर बात में उतर आई ...


मुझ को रोटी की ही भूख होती
तो ठीक था
जाने कहां से शान ओ शौहरत की
चाहत जग आ
मेहनत से काम चल रहा था खासा
अब बेईमानी हर बात में उतर आई ...