पहर कोई नहीं देखता,ना फ़िक्र किसी मौसम की है,सुबह शाम, सर्दी गर्मी और ये बारिशें,सब बेमानी है इश्क़ के लिए ...
पहर कोई नहीं देखता,ना फ़िक्र किसी मौसम की है,
सुबह शाम, सर्दी गर्मी और ये बारिशें,सब बेमानी है इश्क़ के लिए ...