सूना रह गया है आंगन अबकुछ नहीं चहल पहल रहतीतुलसी भी सूख चली हैहर दीवार इसकी झड़ चली हैकोई दीवाली फिर आए ऐसीसब आए फिर दीप जलाए फिररोशन हो जाए फिर आंगनआके कोई जाले हटाए अब ...
सूना रह गया है आंगन अबकुछ नहीं चहल पहल रहती
तुलसी भी सूख चली हैहर दीवार इसकी झड़ चली है
कोई दीवाली फिर आए ऐसीसब आए फिर दीप जलाए फिर
रोशन हो जाए फिर आंगनआके कोई जाले हटाए अब ...