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अंधेरा घना


किस बात पे रोशन करूं मकान अपनाकिस बात पे चिराग जलाऊं

किस बात की दीवालीकिस बात पे ईद मनाऊं

जो था खुशी चला गया है रूठ केबता कैसे उसे मना के घर मैं ले आऊं ...

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