किससे मिलने आए हो साहबअब तो कोई नहीं रहता यहांबहुत रोज़ हुए उसे गुज़रे हुएजो शख्स इक पागल साइस मकां में रहता थापूछता था रोज़ हर किसी सेकोई आया है क्या मुझे पूछते यहांजाने किसके इंतज़ार में रहता था ...
किससे मिलने आए हो साहबअब तो कोई नहीं रहता यहां
बहुत रोज़ हुए उसे गुज़रे हुएजो शख्स इक पागल सा
इस मकां में रहता थापूछता था रोज़ हर किसी से
कोई आया है क्या मुझे पूछते यहांजाने किसके इंतज़ार में रहता था ...