एक याद मन में समाई है, नयनों में नीर की बदरी छाई है।
भूली-बिसरी याद कहानी आई है, समय ने की कैसी बेवफाई है।
याद थे जो जुबानी, मोड़ दिए थे पन्ने कुछ उस कहानी के।
खोल तिजोरी यादों की, उनको पलट सामने वो लाई है।
एक याद मन में समाई है, नयनों में नीर की बदरी छाई है।।
