जिस्म को छूकर , 

हवा भी झूम जातीं हैं क्या?

जब सागर में उतरती हो, यूं मदहोश हो कर

लहरें तुम्हें चूम जातीं हैं क्या ?


इन निगाहों में आकर सपनों को

 सुकून आया तो होगा?

रात की गहराईयां

कालिमा 'काजल' की 

भोर की लालिमा

स्याहियां बादल की

इन सबने तुमसे कुछ ना कुछ तो पाया होगा ?


देखकर तुम्हें , चांदनी भी शर्माकर घूम जातीं हैं क्या?

जिस्म को छूकर , हवा भी झूम जातीं हैं क्या?