आंखों के थे सपने पूरे

अधूरा मैं रहा,

हर कहानी हुई पूरी

उसी दिन

हर साम थी एक शुरुआत,

पर अधूरा मैं रहा,

जिस्म में चस्पा 

था जो सब कुछ ही तुम्हारा

देकर सरेराह

आगे बढ़ा,

और अधूरा मैं रहा

यूं नदी सरीखी.. आ मिली

 लहरों के छटपटाहट लिए

 'सागर' सा आज भी

अधूरा मैं रहा....