हार को जीत में बदलना है

रुकना नहीं, मुझे चलना है !!


है फर्क नहीं, अब तानों से

मुझे भीड़ से निकलना है !!


बनना है एक मिशाल मुझे

परिश्रम की आंच में जलना है !!


बाधायें चाहे जितनी भी आएं

हर मुश्किल में संभलना है !!


मै सूरज नहीं हूं शाम का

जो मुझे अब ढलना है !!


मै उगता सूरज हूं सुबह का

अभी तो आग उगलना है!!


~अम्बर तिवारी