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सर्वस्व


दान किया था एक मैंने अपने सर्वस्व का, ‘पर’ की खातिर पर क्या पता था मुझे कि एक दिन वही ग्राही लौटा देगा उस का सर्वस्व, ब्याज़ सहित मुझे।

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