नेताजी करत करत ज़बान सूख गई हमारी। फिर भी न ईने ध्यान धरो जी के लिए ज़िंदगी गुज़र गई हमारी। इधर से उधर, उधर से इधर इनके काम में रत रहे, ज़िंदगी भर। फिर भी हमको फायदा न मिला इनके नेता होने का, रत्ती भर।