मैं क्यों डरती हूँ, जब मैं अकेली होती हूँ? मैं क्यों डरती हूँ, जब मैं घिरी हुई होती हूँ? मैं क्यों डरती हूँ, जब मैं बाहर निकलती हूँ? एक लड़की।   मेरा चीरहरण केवल तुम्हारे हाथों से ही नहीं होता, तुम्हारी बातें भी यह काम कर देती हैं। तुम्हारी नज़रें भी यह काम कर देती है। तुम्हारी सोच भी यह काम कर देती है।   मेरी इज्ज़त केवल तुम्हारा शरीर ही नहीं लूटता, तुम्हारी बातें भी यह काम कर देती हैं। तुम्हारी नज़रें भी यह काम कर देती हैं। तुम्हारी सोच भी यह काम कर देती है।
  • एक लड़की।
  मैं तो रोज़ तन ढँक कर ही निकलती हूँ पर तुम्हारी नज़रों ने मुझे हमेशा ही नंगा देखा हैं।   मैं तो रोज़ घर से ‘वर्जिन’ निकलती हूँ पर तुम्हारी नज़रों ने, तुम्हारी सोच ने मुझे नोंच-नोंच कर खा लेने के बाद ही घर भेजा हैं। एक लड़की।