क्षमाशील है धर्म अपना क्षमा सबको कर देना है मानवता की खातिर हमको प्राण भी अपने दे देना है देश, धर्म की खातिर तन, मन, धन दाँव रख देना है इंसानियत की पदवी से सबको विभूषित कर देना है ये मातृभूमि ही तो है अपनी जिसको बलिदान अपना देना है कहें जय मातृभूमि - जय देश यही प्राण अब सबको लेना है।