1 min read 793.7K reads

हमसफ़र


आग़ाज़ अगर तुझसे हो तो, अंजाम की परवाह क्यों करूँनामाबर अगर तू हो तो, ख़बर की परवाह क्यों करूँ ,डर लगता है कभी-कभी रह-गुज़र को देख कर,पर हमसफ़र अगर तू है तो मंज़िलों की परवाह क्यों करू

,

ँ

Read more Earn more Learn more