शुरू करो अभियान's image
96K

शुरू करो अभियान

सुनो जन का अश्रव्य दारूण गान।

जहाँ पहुंचे न ज्योति रवि की, वहाँ करो प्रस्थान।।

जो वांछित, असहाय , अकिंचन, नीरस जिनका संसार।

जो निष्कासित मुख्य पटल से, उनमें भर दो प्राण।। 

जहाँ पड़ी न विभा प्रगति की, तमस छत्रछाया अनंत में।

अरुण, सुधाकर जिनको प्रतिदिन, लागे एक समान।।

जहाँ
Read More! Earn More! Learn More!