दिल को मेरे तोड़ा तुमने......अच्छा है,
रिश्ता तन्हाई से जोड़ा तुमने अच्छा है,
मंज़िल तक जाने का तेरा वादा था,
बीच सफ़र में छोड़ा तुमने.अच्छा है,
दर्द भरे कुछ छाले थे दिल के अंदर,
ख़ार लगाकर फोड़ा तुमने अच्छा है।
जब ज़रूरत थी तेरी सबसे ज्यादा,
तब-तब मुँह है मोड़ा तुमने अच्छा है,
थोड़ा सा बर्बाद हुआ मैं पहले था,
और कर दिया थोड़ा तुमने अच्छा है।
अमर संदीप


