मेरी कोशिश रही, कि मुलाक़ातें बनी रहें।

आप खुद ही, नज़रो से उतर जाएं तो ठीक।

आपकी भी जिंदादिली के चर्चे हो रहें,

मसलन आप भी सुधर जाएं तो ठीक।।


हम में गुस्सा है, दिलफरेबी है, बेईमानी है।

मेरे रस्ते से आप भी गुजर जाएं तो ठीक।

जिस शख्सियत को कभी हमने सराहा था,

आप में वो 'आप' नजर आएं तो ठीक।।



दिन झगड़ते हुए, रातें लाड में बीतें।

कोई आप सा सितम ढाए, तो ठीक।

आप के लड़ने से कब एतराज़ था हमें,

बीच बहस में कोई गालों को चूम जाए तो ठीक।।


~अमर_अल्फ़ाज़