क्या कहूं तुझे .........

तू तो देखती नहीं ,

राह तेरी ........... कहाँ है मेरी

क्यों नहीं एक ये हो,


क्या कहूं तुझे,

साँस तेरी .... मेरी क्यों नहीं

मेरी हर एक तेरे लिए चली



आशियाँ तेरे बिना सुना

ये तू क्यों माने ना,

क्या कहूं तुझे,


आखिर तू इतनी जिद्द में

ही क्यों है अटकी,

जिंदगी तुझ बिन...

सिर्फ मेरी ......... पानी बिन

राजस्थान का वो मरुस्थल


जहाँ है जीवन काटों के साथ!!!!