ख्वाब एक हसीं फिर मुझको दिखा दे, खुशनुमा अरमान सारे फिर जगा दे। ये बेरुखी ज़िन्दगी की सह न सकूँगा आँचल की छाओं में तेरे फिर जी उठूंगा। क्यों सहूँ बोझ मैं अपने बीते दौरे का साथ जिसने न निभाया मैं नहीं कोई और था। अतीत की गहराईयो से अब मुझे आज़ाद कर रोशन कर जहाँ मेरा खुशियों का आगाज़ कर। माना थोड़ा टूट गया हूँ वक़्त के थपेड़ों से पर अब भी बिखरा नहीं में दर्द की इन लहरों से। दफ़्न हैं जज़्बात जो दिल में एक मुद्दत से जगा फिर उनको चाहूंगा तुझे पूरी शिद्दत से। अधूरी सारी ख़्वाहिशों की यादें मिटाना हे मुझे साथ तेरे फिर नयी जन्नत सजाना है मुझे। तेरी हर तमन्ना हर अरमान को अब मेरा पता दे ख्वाब एक हसीं फिर मुझको दिखा दे..