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जीवन एक जंग

मैं सोचूं हर पल ये की तुमसे बहतर कुछ कर जाऊं, मैं हर दम हर इंसा से आगे रहना चाहूँ। चैन नहीं मुझको पा के भी ये दो जहाँ, तृप्ति मेरे मन की आखिर सम्भव है कहाँ! हर सफलता पर तुम्हारी मैं झूठ ही मुस्काता हूँ, जो निराश तुम होते हो झूठे आंसू भी बहाता
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