एक लड़की कठपुतली सरीखी

जब -जब मुझसे मिलती है

इन भूलीं भटकी राहों पर

बस है तकती , कुछ न कहती

आंखों में तबस्सुम की बिजली

होंठों को दबा के दांतों तले

उँगलियों से इशारे करती,

बालों में हवा की अंगड़ाई

गालों पर धूप की रानाई,

बदन है,बेल कोई दीवानी है

वो सहराओं का पानी है

आँचल में पिरोती है तारें

वो क़हकशाओं की रानी है,

वो दस्त में भटकी आहू है

वो खिजाँ के पल की ख़ुश्बू है

वो पागल-पागल फिरने वाली

वो लड़की नहीं है , ज़ादू है |

-"अमन"