देख कर नई पड़ोसन को, दिल मेरा ललचाए

अब तो उसके दर्शन के बिन, दिल मेरा न रह पाए

 

शक्कर जैसे बोली उसकी. शहद की जैसी बातें

उसकीजूड़े की खुशबू से, महके दिन और रातें 


आँखें उसकी हिरनी जैसी, पखुड़ियों से होंठजुल्फें

नागिन सी लहराए, उसपर घूँघट की ओट

 

सुराही जैसी गर्दन को, जब मेरी ओर घुमाए

देखकर उसके अधरों का तील, दिल घायल होजाए

 

कमरपतली ऐसी जैसे, खेतों की पगडंडी

पानेकी चाहत मे भरता है, मन आहें ठंडी-ठंडी

 

चांदी जैसा बदन चमकता, उसपर सुनहरे बाल

बीनपिये चढ़ जाए नशा, टेढ़ी हो जाए चाल


निर्मलकाया कोमल छाया, बड़ी तेज़ है उसकी मायजिसने

भी देखा है उसको, उसके जाल से बच नहीं पाया

 

जबसे हमने देखा उसको, उसके साथी से जलते हैं

बातकोइ ना जान सका ये, हम भी उस पर मारता हैं

 

परवो तो है चीज़ पराई, अपनी भी है एक लुगाईलेकिन

उसमे वो बात नहीं, इसने जो है प्यासजगाई

 

अब तो हम भौंरे जैसे, उसको घेरे रहते है

काम-धाम सब छोड़ छाड़ कर, बस पहरेदारी करते है


बस उसको ही तकने के खातिर, खिड़की नई बनवाई हैपीछे

से भी ताड़ सके हम, तभी एक ऐनक भी लगाई है 


मेरे उसके आँगन के बीच, अब कोई दीवार नहीं

आशिक कोई भी बन सकता है, पर मुझ जैसा पहरेदार नहीं


अब तो मेरा जगना सोना, उसकी याद में होता है

मै भले हूँ तन में अपने, मन, उसके साथ हीं होता है

 

मगर कभी जो बीवी मेरी, मन को मेरे भाँप गयी

और मेरे ख्यालो को वो, मन हीं मन में जान गई

 

दिनवही बस अंतिम होगा, फिर ना दिल ये धड़केगा

टूटे गाये रोज़ मगर पर, फिर कभी ना तड़पेगा


फिर तो हम भी धोबी के कुत्ते बनकर रह जायेंगे

पत्नि ना घर में आने देगी, ना बाहर के हो पायेंगे