कुछ ऐसा करो कि अपने लोग, बेमौत न मारे जाएं

जिन्होंने यह नरसंहार किया, वे अपनी नियति को पाएँ।


अब न हमसे सहन हो रहा, यह आतंकवाद का हमला,

मुँहतोड़ जवाब देना है, उनके घर को बनाकर मलबा।


बस संधि तोड़ने से उनका साहस नहीं टूटेगा,

बातें करते रहने से, कश्मीर का लालच नहीं छूटेगा।


अब उनके घर तक जाकर, अपना घर बचाना होगा,

क्या कर सकते हैं हम, दुनिया को यह दिखलाना होगा।