हाँ, मगर चाहा था मैंने कि एक दिन तेरा सब्र टूटे

जैसे मेरे दिल में फूटा, तुझमें भी प्रेम का अंकुर फूटे

हाँ, मगर चाहा था मैंने कि तुम बस मुझसे ही प्यार करो

जैसे रटूँ मैं नाम तुम्हारा, तुम मेरे नाम का जाप करो



हाँ, यही चाहा था मैंने कि हम एक-दूजे के हो जाएं

हाथ पकड़ कर एक-दूजे का बेसुध होकर खो जाएं

हाँ, यही चाहा था मैंने कि पहले तुम इज़हार करो

जितना मैंने चाहा तुमको, तुम मुझसे उतना प्यार करो