कृष्ण राधा जिसके अभिमान बने
राम सीता इसके प्रतिमान बने
न जाने कैसे मीरा कृष्ण क़ो बुलाने मे माहिर है
ये प्रेम के क़िस्से कैसे इतने जग ज़ाहिर है
पार्वती कैसे शिव की अनुयायी बनी
उर्मिला कैसे लक्ष्मण की परछाई बनी
रेवती ने कैसे बलराम क़ो जीत लिया
रुक्मणी ने कैसे श्री कृष्ण क़ा प्रीत लिया
प्रेम के कपाट से लक्ष्मी - विष्णु भी कहाँ शेष है
ना पूछो कि रिद्धि-सिद्धि के देवता क्यूँ गणेश है
पुलोमा की पुत्री - शचि कैसे इंद्राणी बन गई
सती के प्रेम मे कैसे महेश की दक्ष से ठन गई
प्रेम ने कैसे मांडवी-भरत मे अपना परिवेश चुना
शूर्पणखा ने भी तो प्रेम मे ही अपने कुल क़ा क्लेश चुना
कैसे स्वाहा अग्नि के प्रेम मे पावक बनी
स्वस्थि भी तो प्रेम मे ही वायु की आराधक बनी
प्रेम के अनूठे वार से आज तक कहाँ कोई बच पाया है
देव -इंसान - राक्षस एवं प्रकृत , इसने तो सबको ही तड़पाय़ा है
गीता ने तो प्रेम क़ो भी पूजा क़ा ही पंथ बताया
अतुल्य , अमूल्य जीवन जीवन मे प्रेम क़ो ही अनंत बताया
राधे राधे ❤✨

