सदा कहते रहती थी
यूं क्यों मौन हो...
आज मिली राहों में
अजनबी के साथ तो
कह बैठी कौन हो..
हमने भी जवाब दिया
वही जिसकी यादों में लिपटकर
रात - रात भर जगा करती थी..
हां वही जिसकी बाहों में तुम
गौण हो जाया करती थी..
हां माना, सनम नया है तुम्हारे साथ
मगर हम भी नए थे तब तुम्हारे साथ
दल बदलने से , दिल नहीं बदलते
हम तब भी थे, आज भी है तुम्हारे साथ..


