हमारे शब्द उसे चुभते है बहुत
खैर, उनकी नजर हमे खोजते भी है बहुत..
हमारे उनके दरमियान फासले है बहुत
मगर दिल की नजदीकियां भी है बहुत..
यूं तो निशानेबाज हम पक्के है
दिल चूक गया तो नादानियां भारी पड़ गई बहुत...
रात कट जाती थी उनसे बात करते करते
खामखां अब रात भी परेशान करती है बहुत
इंतज़ार में हम अब ना है उसके ना फरियाद में
मगर अब उसकी भी याद आती है बहुत..


