हां याद आयेंगे
जब नर्गिश सी आंखों में
कोई नूतन अयाना
उतरने का प्रयास करेगा
तो उस मिलन कि मिलन
से पहले हमारे नयन
और ये सनम दोनों
याद आयेंगे।
मोगरे से भरी पड़ी
शय्या पे निद्रा के
गहराई में जब अचानक
तुम्हारे अधर -द्वय से मेरे
नाम निकलेंगे तब इस बावरे
की चंचलता तेरे ब्यथित मन को
याद आयेंगे।
रोते बिलखते जब तुम
अपने बाहों में तकिए को
बांध कर मोती की नदी
बहाओगी तो मेरे कंधे
याद आयेंगे।
पढ़ते पढ़ते थक जाओगी तो
किसके वक्ष पे धर शीश
सुकून की चैन पाओगी तब
याद आयेंगे।
सिंदूर किसी अनजाने के
नाम का भरोगी
तो मुझसे किए गए साथ
जीने मरने के अटूट वादे
सब याद आयेंगे।
~अमन
