सुशांत

सब झूठ है

ये चकाचौंध शहर

करिश्माई डगर

ये फिल्मी ज़हर

सब झूठ है।


यूं न जाते तो 

अच्छा होता

बताते उसे जो कोई

दोस्त सच्चा होता।

दबा रखे थे अंदर

इतने तूफान

निकाल लेते 

अच्छा होता।


शुद्ध देशी से छिछोरे बने

फिर बने धोनी जैसे महान

बावजूद इसके तुम थे परेशान

क्या कोई न था निदान

क्यूं ले लिए अपनी जान।


उदाश और हताश हूं

कैसा है ये ईश्वर का अक्रांत

मन हो गया व्यथित और अशांत

क्यों कर लिए खुद को शांत

बहुत याद आओगे सुशांत।

   ~अमन ~