सब पूछ रहे है अब क्या किया जाए..
सारे गम मिटा के शराब पिया जाए
आएंगे मौके बहुत इस समर में
बस अबकी थोड़ा सब्र किया जाए..
भीड़ बहुत है इस युद्ध में, तुम अकेले सही
हूजूम से निकलकर बढ़ो आगे, तुम बनो वही
अरे बड़े बड़े शेर ख़ान आएंगे गिराने
आजमाने दो सबको अपनी ताक़त, लेकिन तुम हो सबसे सही..
दोष तुम्हारा नहीं, हमारा है
जो साथ ना दे, बस उसी का लेते सहारा है
कितने आए कितने गए, इसे भी सह लेंगे
तुमने तो कइयों को यूंही लताड़ा है..
हां थोड़ा इंतजार लंबा हो रहा है
ये शहर गुमशुदा हो रहा है
कब तक यूं अनाथों की तरह रहे
अब तो सच भी ख़ामोश हो रहा है..


