छोटे छोटे लम्हों को जोड़कर
यादों के बाज़ार लगाए बैठे है
इन्हीं यादों के सहारे हम
बड़े बड़े सपने सजाए बैठे है
बंद आंखों से देखे गए सपने
अक्सर सपने रह जाते है
खुली आंखों से देखे गए सपने
अक्सर कहानी रच जाते है
सपने, ख्वाब,इच्छाएं सब पूरी होती है
बशर्ते कि मेहनत जरूरी होती है
हां मगर जिन्हें सपने बस देखने होते है
उनके सपने अक्सर अधूरे होते है
सपनों की दुनिया में कदम तो रखो
जरा जिंदगी का ये कलेवर भी तो चखो
कितने रहस्य है इस कंटीले डगर में
जरा खुद को भी एक बार परखो
~अमन
