दफ्न किए गए हर राज से पर्दा उठेगा

हक़ीक़त तुम ना बयां करोगे तो आवाज उठाना पड़ेगा..


जुर्म जब इंतेहा की हद पार करेगा तो

अपने किए गए कुकर्मों का जुर्माना भरना पड़ेगा..


नशे में वो था तो तुम्हे किसका नशा था

बदनाम उसे करोगे तो, तुम्हे भी सरेआम बदनाम होना पड़ेगा..


क्या मिला गुनाह के लिए प्यार कुर्बान करके

अब तुम्हे भी खुद को कुर्बान करना पड़ेगा


अंदाज़ तुम्हारा कातिलाना है 

मगर तुम ही कातिल हो, ये तुम्हे बताना पड़ेगा...


सुना है शहर में तुम्हारे रसूख बहुत है मगर

डंडा सटीक हो तो रसूखदारों को भी तुम्हारा साथ महंगा पड़ेगा..


घमंड तुम्हारा चकनाचूर होकर रहेगा

जितना दर्द उसे दिया है, उससे ज्यादा सहना पड़ेगा...