गर्भ से निकलते ही पापा के सपने बन गए
इंजीनियर बनाऊंगा यही सोच कर ठन गए
अंग्रेजी मीडियम वाली स्कूल में पढ़ाऊंगा
विज्ञान की अलग से शिक्षक रखूंगा
सब सोच लिया था उन्होंने
आंखो में वो सपने थे
जिन्हे उस संतान को पूरे करने थे
लड़का भी तैयार हुआ
बारहवी में उसे प्यार हुआ
फिर उसका आईआईटी वाला परीक्षा बेकार हुआ
टूट गए पिता के देखे गए सपने
लड़की भी लगी बिछड़ने
चोट लगी ऐसी की मर जाने का विचार हुआ
फिर उसी पिता के सपने का विचार हुआ
लड़के ने भी ठाना
अब वचन नहीं रण होगा
ना कोई मजाक, ना प्रैंक होगा
अब सीधे यूपीएससी क्रैक होगा
इंजीनियर नहीं अब वो आईएएस है
उसके सामने सब माइनस है
~अमन


