
सुनो ओ दूधिया रौशनी में डूबे, वंशवाद के दानव
हमसे न टकराव, लपेट के दो लगाएंगे तुरंत बन जाओगे मानव।
जब से दुनिया बनी है तुम दबा रहे हो
इतने जुल्म ढा रहे हो, फिर भी पटके जा रहे है।
कभी क्षेत्रवाद के कारण, कभी छोटे शहर वाले के काम पर
तुम अपनी ज़मीर बेच रहे हो, नेपोटिज्म के नाम पर।
बाप दादाओं के नाम से कमा रहे हो,और अकड़ हमे दिखाओगे
बताए नाम अपने पुरखो कि, सुनते ही पसीने पसीने हो जाओगे।
माफिया, अंडरवर्ल्ड के पैसे पे बैठ के इतराते हो
और प्रतिभा से चमकने वाले को धमकाते हो।
तुम्हारे तथाकथित
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