देखिए भाई, दिल पे लिखते थे 

तो कोई दिल्लगी ना हो पाई

अभी मौसम फेफड़ों के तरफ़ कर रही इशारा

ए बहकाने वाले कवि, 

लिख कुछ ऐसा की 

कोई मिल जाए हरजाई...

दिल खून मांगता था,

ये तो सांसें मांग रहा है

वो धड़कता था तो जिंदा था

ये तो सिलेंडर में हवा मांग रहा है..

भाई सुनों, अब रहन दो

इश्क़ का काम दिल का है

तुम अपनी ख्वाइशों को कफ़न दो...

~अमन