मिलते तो खुशनसीब समझते
दिल के कुछ बचे सवाल करते...
पूछते गुनाह क्या ऐसा हुआ
बिना वजह यूं तो ना बिछड़ते..
गर दिल से आवाज़ें आती होगी तो
ख़्वाबों में हमारे ही ख़्वाब पलते..
बेवजह बेकरारी का बहाना छोड़ दो अब
झूठे बातों से दिल बेकरार ना करते..
दफ़न हुए वादों का क्या सोचा तुमने
इरादें कमजोर थे तो वादें ना करते...
~अमन


