लहरों का लहर रहने दो
हमें बेबस बेअसर रहने दो
तुमको ना मालूम हमारे अंदर
चल रहे जलजलों की कहानी
हमें यूं ही बेखबर रहने दो...
एकदम निठल्ले , निकम्मे रहने दो
गिरते जिंदगी से सदमे में रहने दो
सबके सवालों का जवाब ना दे सकता हूं
हमें अब यूहीं हद में रहने दो...
सर से पांव तक बर्बाद हूं मैं
अब हमे यूं जल्लाद ही रहने दो
समय के बांध में हमें ना बांधो
हमें अब यूं आबाद ही रहने दो...
कौन सी खुशी? कौन सी गम
अब हमसे ना पूछो मेरे ज़ख्म
हमने ये सोचना ही बंद कर दिया कि
किसके सोहबत में हमनें पकड़ा था चिलम.
आजाद हूं ये पूरा आसमां और
धरती मेरी है
अब ना कोई इच्छा अधूरी है
जिन्हे जाना था वो खुशी से गए
हम दर्द में ही रहे,क्या जरूरी है?
~अमन


