उनकी आंखों से हुए, इशारें हम क्या देखें....
उलझ गए है होठों पर, आंखें क्या देखें...
उलझनें अब होठों की है, नखरें क्या परखें
शब्दों से शहद टपक रहे हैं, चेहरें क्या देखें..
अदाएं सांसें तेज़ कर रही है और धड़कनें बेचैन
चलन मनमोहक है तो बाल सुनहरें क्या देखें..
वो दूर जो आसमां से रौशनी बिखेर रहा है
आज जमीं पे है, तो दूर वाले चांद सितारें क्या देखें...
