अजीब दास्तां है
सरकार सरकार बनाने में मस्त
जनता जान बचाते बचाते पस्त..
गुज़ारिश ये है की जोख़िम ना उठाए
पहले खुद बचे, फिर सरकार बनाए...
अस्पतालों में बेड नहीं, सिलेंडरों में ऑक्सीजन नहीं
साहब उड़ गए जैसे इनके जाने से बन जाएगी सरकार कही..
कुदरत का कहर है, भगवान खुद आफ़त में है
इलाज़ किसी का कैसे करे जब खुद गिरफ्त में है..
~अमन


