थोड़ा थम के सहम जाइए

ज़ख्म बहुत हुए, अब मरहम चाहिए...


ना बचाव का उपाय है ना ही मुनासिब दवाई

मौत पीछे पड़ी है, अब कित्ता करे लड़ाई...


हिम्मत में हिम्मत ठूस के खड़े है

ना चाहते हुए भी, घर में पड़े है..