"अमन" मानो तुम मेरा कहना
ज़ख्म बहुत मिलेंगे, फिर हमें ना कुछ कहना..
तरह तरह के हथकंडे अपनाए जाएंगे
तुम अगर सह सको तो सहना..
तक़दीर और बलवीर दोनों रोकेंगे तुम्हें
जीतना चाहते हो तो बिना डरे लड़ना..
ये सर्द हवाएं कुछ कह रही है तुमसे
मन विचलित हो फिर भी ख़ामोश रहना..
मकबूल होंगे तुम्हारे ख़्वाब सारे
बस यूंही खुले आसमां में उड़ना..
~अमन


