धधकती ज्वाला को सीने में लिए जो सीमा पे लड़ रहे है

कड़कती ठंड में भी जो सिना ताने अड़ रहे है

बरसते अंगारों के बीच जो दुश्मनों को खदेड़ रहे है

उन साहसिक वीर जाबांजों का कर्ज कैसे चुकाएंगे


दूध के कर्ज चुकाने से पहले मिट्टी का कर्ज चुकाने आ गए

इस खूनी रण में जो प्राण की आहूति देने आ गए

विरोधियों के बली चढ़ाने रक्त चंडी बनकर छा गए

ऐसे त्याग वाले सपूतों का कर्ज कैसे चुकाएंगे


उस मातृत्व शक्ति को नमन है, जिसने इन्हे जन्म दिया

हिम्मत देख उस बाप की जिसने मातृ भूमि की रक्षा को एक मात्र पुत्र को भेज दिया

हिम्मत उस बहन की ललकार रही है जिसने कलाई में राखी बांधी और हाथ में तलवार दिया

उर्मिला जैसे त्यागी प्रिया का कर्ज़ कैसे चुकाएंगे

       ~अमन