किसे समझाएं किससे समझे

सब इसी में है बस उलझे


हम भी तकलीफ़ में है, वो भी तकलीफ़ में है

मगर ए दोस्त, कभी तो कुछ सुलझे


चिंता कौन किसकी करता है यहां

सब खुद यहां, खुद से है जूझे..


किसी को दिल की कहो तो

ज़माने को कहां, हमारी दर्द सुझे...