
सरहदों को घर बना चुका हूं
धरती को बिछावन
आसमां छत है मेरा
रेत की लहरें मेरा सावन....
लहू को ईंधन बना जलाते है
बंदूक मेरी देख दुश्मन थर्राते है
खाकी जिस्म पर चढ़ती है
तो बमों की बरसात में नहाते है...
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सरहदों को घर बना चुका हूं
धरती को बिछावन
आसमां छत है मेरा
रेत की लहरें मेरा सावन....
लहू को ईंधन बना जलाते है
बंदूक मेरी देख दुश्मन थर्राते है
खाकी जिस्म पर चढ़ती है
तो बमों की बरसात में नहाते है...