सारी मुलाकातों का क्या परिणाम हुआ
हम ख्वाबों में सोए रह गए
और हमारी सांसे उनके नाम हुआ...
निगाहों का निगाहों से टकराव हुआ
सारी सारी रातें बातों का स्राव हुआ
सुबह फिर हमारा इश्क़ बदनाम हुआ..
मन आकांक्षाओं से गुब्बारा हो गया है
और हां, इश्क़ दुबारा हो गया है..
हम सजोए है सपने मिलन के
कैसे होंगे दीदार सजन के
जब मिलेंगी नज़रे तो
दौड़ने लगेगी खून बदन के
ये वादें जो पूरे हुए है
हमारे तुम्हारे इरादों के
यूं ही सदा बना रहे हरदम
मुहब्बत कायम रहे शहजादी और शहजादों के..


